तुम्हारे जाने के बाद ऐसा सन्नाटा है,
दिल तो धड़कता है पर किसी से क्या कहता है,
ज़ख्म भी भर जाते अगर तुम साथ होते,
पर दर्द आज भी हर रात कहर ढाता है।
तुम मिले तो लगा जिंदगी मिल गई,
तुम गए तो लगा सांसें भी चली गई,
अब तो आदत भी हो गई है दर्द की,
ये मोहब्बत भी ना कितनी सजा दे गई।
किस्मत ने भी हमसे अजीब खेल खेला है,
जिसे चाहा दिल से वही दूर निकला है,
हम रोए बहुत किसी को पाने के लिए,
और वो हंसते रहे हमें खोने के लिए।
कहते हैं वक्त हर घाव भर देता है,
पर कुछ जख्म दिल में घर कर लेते हैं,
तुम्हारी यादें भी अब आदत बन गईं,
जो हर रात आंखों को नम कर देती हैं।
तेरी खामोशी ने ये एहसास दिलाया,
कि मोहब्बत में भी कभी शिकवा न आया,
हमने हर दर्द मुस्कुरा कर सहा,
पर तूने पलटकर देखना भी जरूरी न समझा।
तोड़कर ऐसे चले गए जैसे पहचान ही न थी,
दिल में उतरकर ऐसे मिटे जैसे कोई निशान ही न थी,
हम तो आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं,
जहाँ तुमने कहा था “बस यही तक कहानी थी।”
तेरा होना भी दर्द देता था,
और तेरा न होना भी दर्द देता है,
कैसी ये मोहब्बत थी मेरी,
जो हर हाल में सिर्फ जख्म ही देता है।
तुम्हारे बाद अब कोई अपना नहीं लगता,
दिल में कोई ख्वाब भी अपना नहीं लगता,
हमने सब कुछ दे दिया इस रिश्ते में,
फिर भी हमें तुम्हारे जैसा कोई प्यारा नहीं लगता।
कितनी रातें तुम्हारे ख्याल में गुजर जाती हैं,
कितनी बातें दिल में ही रह जाती हैं,
तुमसे दूर रहकर हमने ये जाना,
मोहब्बत से ज्यादा दर्द मोहब्बत दे जाती है।
तुमसे बिछड़कर भी हम मुस्कुराते रहे,
दिल को समझाकर खुद को मनाते रहे,
जीना सीख ही गए तुम्हारे बिना,
पर हर धड़कन में तुम्हें बुलाते रहे।
तुम्हारी यादों का समंदर इतना गहरा है,
डूबने का डर भी है पर कश्ती भी वहीं ठहरा है,
हम निकलना चाहें भी तो निकल नहीं पाते,
क्योंकि दिल का हर रास्ता तुम्हारी तरफ बहता है।
मुस्कुराना भी अब दर्द देता है,
हर खुशी पर तेरा नाम उभर आता है,
कुछ रिश्ते कभी पुराने नहीं होते,
बस लोग बदल जाते हैं और दिल रो पड़ता है।
तुम्हारी बातों में वो सुकून था जो अब किसी में नहीं,
तुम्हारी खामोशी में भी एक अपनापन था जो अब कहीं नहीं,
अब तो आदत हो गई है तन्हाई की,
क्योंकि तुम्हारे बिना कोई अपना लगता ही नहीं।
तुमसे मिली हर खुशी आज दर्द बन गई,
दिल में छिपी हर हंसी आज खामोश बन गई,
सोचा था साथ चलेंगे उम्रभर,
पर तुम्हारी राह तो कहीं और ही मुड़ गई।
तुम्हें खोकर खुद को ही खो दिया मैंने,
दिल की हर धड़कन को रुला दिया मैंने,
किसी ने पूछा मोहब्बत कैसी होती है?
मैंने अपना टूटना दिखा दिया मैंने।
कहते हैं सच्चा प्यार कभी टूटता नहीं,
पर मेरा तो बिखरकर भी फिर जुड़ता नहीं,
तुमने जो दर्द दिया है मुझे,
वो किसी दवा से भी भरता नहीं।
तुम्हारी यादों का असर कुछ ऐसा है,
दिल रोए बिना रह नहीं पाता,
मुस्कुराना चाहूं भी तो मुस्कुरा नहीं पाता,
तन्हाई में खुद को संभाल नहीं पाता।
तुम्हारे जाने का ग़म इतना गहरा है,
कि अब किसी को दिल देना भी पहरा है,
प्यार से ज्यादा अब डर लगता है,
क्योंकि हर हंसी के पीछे टूटने का सहरा है।
ना तुम मिले, ना तुम्हारी कमी कम हुई,
ना दर्द रुका, ना सांसें थमी,
ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है,
जो मिटती नहीं… चाहे जितनी खत्म हुई।
दिल टूटे तो आवाज़ भी नहीं होती,
प्यार छूटे तो राहत भी नहीं होती,
कुछ रिश्ते ऐसे जुदा हो जाते हैं,
कि ज़िन्दगी भर उनकी जगह कोई नहीं ले पाता।
