Ruthna Manana Shayari

तुम रूठ भी जाओ तो अच्छा लगता है,
थोड़ा सा नखरा भी सच्चा लगता है,
मनाने का बहाना मिल जाता है हमें,
वरना प्यार तो हम यूँ ही रच्छा रखते हैं।

तुम्हारा रूठ जाना भी क्या कमाल करता है,
दिल को अचानक से बेहाल करता है,
पर जब मुस्कुरा कर मान जाती हो,
सच कहूँ — जान में जान डालता है।

तुम रूठो तो हमें मनाने का मज़ा आता है,
तुम मुस्कुराओ तो दिल दीवाना हो जाता है,
एक तुम्हारी ही अदा से ये रिश्ता चलता है,
कभी तुम समझ जाना — हमारा सब कुछ तुम ही हो।

थोड़ा सा नाराज़ होना भी ज़रूरी है कभी-कभी,
तभी प्यार की गर्माहट बढ़ती है हर घड़ी,
पर तुम्हारा मुँह फुलाना दिल तोड़ देता है,
और तुम्हारा मान जाना — जन्नत जैसा लगता है।

रूठने में भी तुम्हारी वो प्यारी अदा रहती है,
हर ग़ुस्से में भी मोहब्बत की दवा रहती है,
हम तो बस इंतज़ार करते हैं उस पल का,
जब तुम्हारी आँखों में ‘ठीक है’ लिखा रहता है।

तुम नाराज़ हो जाओ तो रातें लंबी हो जाती हैं,
दिल की धड़कनें भी भारी हो जाती हैं,
पर जब तुम हंसकर गले लगती हो,
उसी पल हमारी सारी थकान मिट जाती है।

रूठने का तुम्हारा अंदाज़ भी कितना प्यारा है,
हर ग़ुस्से में भी एक नशा सारा है,
हम तो बस यही सोचते रहते हैं,
कि कब बोलोगी — “चलो ठीक है यार।”

तुम्हारा रूठना हमें अच्छा नहीं लगता,
दिल का हर कोना सूना सा लगता,
जल्दी से मान जाओ मेरी जान,
वरना ये दिल धड़कना भी भूल जाता।

रूठने में भी नटखटपन है तुम्हारा,
मुस्कुराने में भी अपनापन है तुम्हारा,
हम तो बस एक बहाना ढूंढते हैं,
तुम्हें दिल से लगाकर मनाने का प्यारा।

ना रूठो इतना कि लौटना मुश्किल हो जाए,
ना हंसो इतना कि रोना मुश्किल हो जाए,
हम तो बस इतना चाहते हैं जान,
कि तुम हर हाल में हमारे करीब रहो।

तुम रूठती हो तो मौसम भी बदला बदला लगता है,
दिल का हर कोना तन्हा तन्हा लगता है,
लेकिन जब तुम मुस्कुराकर मान जाती हो,
दुनिया का हर दर्द छोटा छोटा लगता है।

थोड़ा सा रूठना भी रिश्तों में मिठास लाता है,
मनाना फिर से करीब ले आता है,
हमारा क्या है… हम तो हर बार हार जाते हैं,
तुम्हारी एक मुस्कान ही सब कुछ जिता जाती है।

ग़ुस्सा तुम करो तो भी अच्छा लगता है,
दिल तुम्हें देखे बिना डर सा लगता है,
जल्दी से मान जाओ मेरी जान,
वरना दिल ये रो-रोकर टूट सा लगता है।

तुम रूठती हो… दिल बेचैन हो जाता है,
सपनों का भी चैन खो जाता है,
बस एक तुम्हारी ‘हां’ का इंतज़ार होता है,
और फिर ये दिल खुद-ब-खुद मुस्कुरा जाता है।

रूठे हो अगर तो मान भी जाना,
एक छोटी-सी मुस्कान दिखा भी जाना,
हमारा क्या है… हम हमेशा तुम्हारे हैं,
पर तुम भी कभी ये जतला भी जाना।

तुम्हारा रूठना भी किसी तोहफ़े से कम नहीं,
मनाने में ही तो हमारा हरदम है यकीन,
मुस्कुरा दो ना बस एक बार,
ये जिंदगी हो जाएगी नए रंगों की मशीन।

थोड़ा ग़ुस्सा, थोड़ी नाराज़गी चलती रहती है,
प्यार की कश्ती इन्हीं लहरों में बहती रहती है,
पर जान… तुम बेवजह मत रूठा करो,
क्योंकि तुम्हारे बिना ये दुनिया सूनी रहती है।

रूठो उतना जितना हम मना सकें,
नाराज़ उतना जितना हम मना सकें,
बस दूर कभी मत जाना जान,
क्योंकि हम तुम्हारे बिना जी ना सकें।

तुम्हारा रूठना भी एक इम्तहान की तरह है,
और तुम्हारा मान जाना इनाम की तरह है,
हर बार तुमको मनाना अच्छा लगता है,
क्योंकि ये रिश्ता हमारी जान से भी प्यारा है।

रूठने-मनाने का सिलसिला यूँ ही चलता रहे,
प्यार का ये मीठा रिश्ता यूँ ही पलता रहे,
तुम रूठो, हम मनाएं — बस इतना काफी है,
क्योंकि यही तो मोहब्बत का सबसे प्यारा पहलू है।

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