हमने खुद को संभाला है गिरकर कई बार,
इसलिए अब किसी का एहसान नहीं चाहिए यार,
आत्मसम्मान पर बात आए तो दुनिया छोड़ देंगे,
पर किसी के सामने झुकना हमें मंज़ूर नहीं है बार-बार।
कद बढ़ाने के लिए सिर झुकाना पड़ता है,
पर हम वो हैं जिन्हें झुकना आता ही नहीं,
इज्ज़त खुद की है तो उसका ध्यान रखना,
क्योंकि टूट जाए तो फिर बनता कभी नहीं।
हम दिल से देते हैं पर भीख नहीं,
हम प्यार निभाते हैं पर झुकते नहीं,
आत्मसम्मान पर चोट पहुंचे अगर,
तो रिश्ते भी हमसे बचते नहीं।
कदम कदम पर रोकने वाले मिलेंगे,
हौसले गिराने वाले भी मिलेंगे,
पर खुद को कम समझना मत कभी,
तुम जैसे लाखों में सिर्फ एक ही मिलेंगे।
इज्ज़त का सौदा हमसे नहीं होगा,
किसी के पीछे भागना नहीं होगा,
जो कदर करे वही अपना कहलाए,
वरना भीड़ में तो सबको साथ नहीं होगा।
हम वो नहीं जो किसी के शब्दों से टूट जाएँ,
हम वो हैं जो खामोशी में भी हजार बातें कह जाएँ,
आत्मसम्मान हमारी ताकत है भाई,
इसे छोड़कर हम कहीं नहीं जाएँ।
कुछ लोग सोचते हैं हम अकेले पड़ जाएंगे,
पर उन्हें क्या पता हम खुद में ही पूरी दुनिया हैं,
जो अपनी इज्ज़त का ध्यान रखना जानते हों,
उनके आगे बड़े-बड़े झुक जाते हैं।
हमारी खामोशी को कमजोरी न समझना,
हम रोते नहीं, किसी को रुलाते नहीं,
बस इतना याद रखना—
आत्मसम्मान पर बात आए तो हम समझाते नहीं।
लोगों को लगता है हम बदल गए,
पर सच ये है कि खुद की कीमत समझ गए,
अब कोई यूँ ही दिल पर पैर नहीं रख सकता,
हम अब खुद का ध्यान रखना सीख गए।
हम दिल जीतना जानते हैं,
पर किसी की बख्शी हुई इज्ज़त नहीं लेते,
आत्मसम्मान से बड़ा कोई रिश्ता नहीं,
इसे खोकर भी लोग दुनिया जीतने निकलते।
हम तब भी खास थे, आज भी खास हैं,
हमारी पहचान हमारे पास है,
जिसे समझना है वो खुद समझ जाएगा,
हम किसी के समझाने के मोहताज नहीं हैं।
खुद की कद्र करो, दुनिया कदर करेगी,
वरना लोग पैर रखकर आगे बढ़ जाएँगे,
आत्मसम्मान अगर साथ हो तो,
गिरकर भी लोग खड़े हो जाएँगे।
हमारी चुप्पी को लोग कमजोरी समझते हैं,
पर वो क्या जानें ये हमारी सबसे बड़ी ताकत है,
जो खुद की इज्ज़त पर समझौता कर ले,
उसे दुनिया सबसे छोटी हालत समझते हैं।
तुम हमें रोक पाओगे ये सोच भी मत,
हम उन रास्तों के भी उस्ताद हैं,
जहाँ लोग जाने की हिम्मत नहीं करते,
हम वहीँ अपना मुकाम बना लेते हैं।
दिल बड़ा होना चाहिए,
पर इज्ज़त पर बात आए तो कड़ाई भी ज़रूरी है,
आत्मसम्मान वो चीज़ है दोस्त,
जो टूट जाए तो दूरी भी ज़रूरी है।
हम किसी पर निर्भर रहना पसंद नहीं करते,
अपने दम पर जीना ही सीख लिया है,
जो खुद की कीमत पहचान ले,
वो दुनिया को भी एक दिन पहचान लिया करता है।
हमारी इज्ज़त हमारी पहचान है,
इसे गिरवी नहीं रखा जाता,
जो इसे ठेस पहुँचाए,
उसे दिल में जगह नहीं दिया जाता।
कई बार दूर जाना पड़ता है,
उन लोगों से जो कदर नहीं करते,
आत्मसम्मान पर चोट लगे जहाँ,
वहाँ रिश्ता नहीं रखा करते।
हमारी कीमत हमें खुद पता है,
दुनिया क्या बताएगी,
आत्मसम्मान की बात हो जहाँ,
हमारी आवाज़ खुद बुलंद हो जाएगी।
हम उन लोगों में से नहीं दोस्त,
जो खुद को किसी से कम समझें,
इज्ज़त अपनी हो या किसी की—
हम हमेशा दोनों का मान रखते हैं।
